बजट 2022: महंगाई, बेरोजगारी और कोरोनावायरस की तीसरी लहर से कैसे निपटेगी सरकार

साजन कुमार, नई दिल्ली

आगामी बजट मोदी सरकार के लिए चुनौती भरा होने वाला हैं। कोरोनावायरस की तीसरी लहर, बेरोजगारी और महंगाई की मार से जिस तरह आम जनता परेशान हैं। सरकार इस बजट के माध्यम से लोगों को राहत पहुंचा सकतीं हैं। वहीं पिछले कुछ दिनों से सेंसेक्स में गिरावट के कारण कारोबारी बाजार भी सहमा हुआ हैं। सच कहूं तो वर्तमान समय में सरकार के पास एक नहीं कई मुद्दे हैं, जिन पर उन्हें ध्यान देने की ज़रूरत हैं। 

बड़ी इकॉनमी का सपना: 


Union Budget 2022-23
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

सरकार हर बार 5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी को लेकर बातें करती हैं। लेकिन कोरोना की दुसरी लहर में देश की अर्थव्यवस्था का जो हाल हुआ वो दयनीय था। हालांकि दूसरी लहर के बाद अर्थव्यवस्था में तेज़ी आई लेकिन वो इतनी नहीं थी कि भारतीय इकॉनॉमी 5 ट्रिलियन डॉलर की हों जाए। हाल ही में एनएसओ के द्वारा जारी किए गए अनुमानों में कहा गया है कि इस साल भारतीय अर्थव्यवस्था 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ तेजी से वृद्धि करने वालीं दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी। जिससे नॉमिनल जीडीपी के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 3.1 ट्रिलियन डॉलर तक हो सकता हैं। उम्मीदें हैं की सरकार बजट में इसके लिए कोई ठोस कदम उठा सकती हैं।

बेरोज़गारी की समस्या:

सरकार की चुनौती अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के अलावे देश में बेरोजगारी की समस्या को भी दूर करना हैं। कोरोना की तीसरी लहर के बीच देश में बेरोजगारी फिर बढ़ने लगी है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी की रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर में बेरोजगारी दर 7.9% रहीं, वहीं शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 9.3% पर पहुंच गई है। सरकार छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देकर उनकी समस्या का समाधान कर सकतीं हैं। इसके अलावे सरकार को विनिर्माण क्षेत्र, ऑटोमोबाइल और फार्मा जैसे क्षेत्रों को भी प्रोत्साहन देना चाहिए। 

मंहगाई बड़ी चुनौती:

बेरोज़गारी के बाद सरकार के सामने सबसे बड़ा मुद्दा मंहगाई का हैं। सरसों तेल की कीमत से लेकर एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि के कारण आम जनता परेशान हैं। कोरोनावायरस के कारण ग़रीबों का रोजगार छीन जाने से उन्हें जीवन यापन करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 

वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल हो जाने के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि देखी जा सकती हैं। हालांकि अभी पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाली है। इसी कारण सरकार पेट्रोल डीजल की कीमतों में वृद्धि करके जोखिम नहीं ले सकतीं।

महंगाई की मार का सबसे ज़्यादा प्रभाव ग़रीबों और मध्यम वर्गीय परिवार पर पड़ता हैं। ऑक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष कोरोनावायरस के दौरान अमीरों की आय में रिकॉर्ड वृद्धि हुई, वहीं 84 प्रतिशत भारतीयों की आय में बेतहाशा कमीं हुई। सरकार को इस बजट के माध्यम से ऐसा प्रावधान लाना चाहिए। जिससे आमलोगों के हाथों में ज्यादा पैसा पहुंचे। कमोडिटी की कीमतों में कमीं करके तथा मनरेगा जैसी योजनाओं को बढ़ावा देकर महंगाई और बेरोज़गारी की समस्या कम की जा सकतीं हैं।

बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराएं सरकार

पिछले साल कोरोनावायरस की दुसरी लहर में भारत के स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई थीं। अस्पताल में बेड की कमीं और पूरे देश में ऑक्सीजन सिलेंडर की मारामारी की खबरों के बीच कई जिंदगियां तबाह हो गई। हालांकि स्थितियों में जल्द ही सुधार लाने का प्रयास किया गया। लेकिन वो प्रयास काफी नहीं हैं। कोरोनावायरस के नए नए वेरियंट्स सरकार को लगातार स्वास्थ्य सेक्टर पर ध्यान देने को मजबूर कर रहीं हैं। 

अभी यही मौका है जिसमें सरकार बुनियादी सुविधाओं में सुधार लाकर आगे आने वाली चुनौतियों से निपट सकें। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क बिजली पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं जन जन का अधिकार है। यदि सरकार आगामी बजट में इन क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाली समस्याओं को कम करने का कोई ठोस प्रावधान लातीं है तो आगामी विधानसभा चुनाव में उन्हें फायदा मिल सकता हैं।

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